
उववासं कुव्वंतो आरंभं जो करेदि मोहादो
सो णिय-देहं सोसदि ण झाडए कम्म-लेसं पि ॥378॥
अन्वयार्थ : [जो उववासं कुव्वंतो] जो उपवास करता हुआ [मोहादो आरंभं करेदि] गृहकार्य के मोह से घर का आरम्भ करता है [सो णियदेहं सोसदि] वह अपने देह को क्षीण करता है [कम्मलेसं पि ण झाडए] कर्मनिर्जरा तो लेशमात्र भी उसके नहीं होती है ।
छाबडा