जो वज्जेदि सचित्तं दुज्जय-जीहा विणिज्जिया तेण
दय-भावो होदि किओ जिण-वयणं पालियं तेण ॥381॥
अन्वयार्थ : [जो सचित्तं वज्जेदि] जो श्रावक सचित्त का त्याग करता है [तेण दुज्जय जीहा विणिज्जिया] उसने दुर्जय जिह्वा इन्द्रिय को भी जीत लिया तथा [दयाभावो किओ होदि] दयाभाव प्रगट किया [तेण जिणवयणं पालियं] और उसी ने जिनदेव के वचनों का पालन किया ।

  छाबडा