
बाहिर-गंथ-विहीणा दरिद्द-मणुवा सहावदो होंति
अब्भंतर-गंथं पुण ण सक्कदे को वि छंडेदुं ॥387॥
अन्वयार्थ : [बाहिरगंथविहीणा दरिद्द मणुआ सहावदो होंति] बाह्य परिग्रह से रहित तो दरिद्रो मनुष्य स्वभाव ही से होते हैं, इसके त्याग में आश्चर्य नहीं है [अभंतरगंथं पुण ण सक्कदे को वि छंडेदुं] अभ्यन्तर परिग्रह को कोई भी छोड़ने में समर्थ नहीं होता है ।
छाबडा