
जो परिहरेदि संगं महिलाणं णेव पस्सदे रूवं
काम-कहादि- णिरीहो णव-विह-बंभं हवे तस्स ॥403॥
अन्वयार्थ : [जो महिलाणं संगं परिहरेदि] जो मुनि स्त्रियों की संगति नहीं करता है [रूवं णेच पस्सदे] उनके रूप को नहीं देखता है [कामकहादिणिरीहो] काम की कथा आदि रहित हो [णव विह] ऐसा नव कोटि से करता है [तस्स बंभं हवे] उसे ब्रह्मचर्य धर्म होता है ।
छाबडा