
एसो दह-प्पयारो धम्मो दह-लक्खणो हवे णियमा
अण्णो ण हवदि धम्मो हिंसा सुहुमा वि जत्थत्थि ॥405॥
अन्वयार्थ : [एसो दहप्पयारो धम्मो णियमा दहलक्खणो हवे] यह दस प्रकार का धर्म ही नियम से दस लक्षण स्वरूप धर्म है [अण्णो जत्थत्थि सुहमा वि हिंसा धम्मो ण हवदि] और अन्य जहाँ सूक्ष्म भी हिंसा होय सो धर्म नहीं है ।
छाबडा