
देव-गुरूण णिमित्तं हिंसा-सहिदो वि होदि जदि धम्मो
हिंसा-रहिदो धम्मो इदि जिण-वयणं हवे अलियं ॥407॥
अन्वयार्थ : [जदि देवगुरूण णिमितं हिंसासहिदो वि धम्मो होदि] यदि देव गुरु के निमित्त हिंसा का आरम्भ भी धर्म हो तो [धम्मो हिंसारहिदो इदि जिणवयणं अलियं हवे] 'धर्म हिंसा रहित है' ऐसा जिनेन्द्र भगवान का वचन अलीक सिद्ध होवे ।
छाबडा