
एदे दह-प्पयारा पावं-कम्मस्स णासिया भणिया
पुण्णस्स य संजणया पर पुण्णत्थं ण कायव्वा ॥409॥
अन्वयार्थ : [एदे दहप्पयारा] ये दस प्रकार के [पावंकम्मस्स णासिया] पाप कर्म का तो नाश करने वाले [य पुण्णस्स संजणया] और पुण्यकर्म को उत्पन्न करनेवाले [भणिया] कहे गये हैं [पर पुण्णत्थं ण कायव्या] परन्तु केवल पुण्य ही के प्रयोजन से इनको अंगीकार करना उचित नहीं है ।
छाबडा