+ निःशंकित गुण -
दय-भावो वि य धम्मो हिंसा-भावो ण भण्णदे धम्मो
इदि संदेहाभावो णिस्संका णिम्मला होदि ॥415॥
अन्वयार्थ : [दयभावो वि य धम्मो] निश्चय से दया भाव ही धर्म है [हिंसाभावो धम्मो ण भण्णदे] हिंसाभाव धर्म नहीं कहलाता है [इदि] ऐसा निश्चय होने पर [संदेहाभावो] सन्देह का अभाव होता है [णिम्मला णिस्संका होदि] वह ही निर्मल निःशंकित गुण है ।

  छाबडा