+ स्थितिकरण गुण -
धम्मादो चलमाणं जो अण्णं संठवेदि धम्मम्मि
अप्पाणं पि सुदिढयदि ठिदि-करणं होदि तस्सेव ॥420॥
अन्वयार्थ : [जो धम्मादो चलमाणं अण्णं धम्मम्मि संठवेदि] जो धर्म से चलायमान होते हुए दूसरे को धर्म में स्थापित करता है [अप्पाणं सुदिढयदि] और अपने आत्मा को भी चलायमान होने से दृढ़ करता है [तस्सेव ठिदिकरणं होदि] उसके निश्चय से स्थितिकरण गुण होता है ।

  छाबडा