+ वात्सल्य गुण -
जो धम्मिएसु भत्तो अणुचरणं कुणदि परम-सद्धाए
पिय-वयणं जंपंतो वच्छल्लं तस्स भव्वस्स ॥421॥
अन्वयार्थ : [जो धम्मिएसु भत्तो] जो (सम्यग्दृष्टि जीव) धार्मिक (सम्यग्दृष्टि श्रावकों तथा मुनियों) में भक्तिवान् हो [अणुचरणं कुणदि] उनके अनुसार प्रवृत्ति करता हो [परमसद्धाए पियवयणं जपतो] परम श्रद्धा से प्रिय वचन बोलता हो [तस्स भव्वस्स वच्छल्ल] उस भव्य के वात्सल्य गुण होता है ।

  छाबडा