
एगादिगिहपमाणं, किं वा संकप्पकप्पियं विरसं ।
भोज्जं पसुव्व भुंजदि, वित्तिपमाणं तवो तस्स ॥443॥
अन्वयार्थ : [एगादिगिहपमाणं] एक-दो आदि ही घर का प्रमाण करके [किं वा संकप्पकप्पियं विरसं] कुछ और भी संकल्प लेकर [भोज्जं वसुव्व भुंजदि] आहार पशु गौ आदि की तरह करे [तस्स वित्तिपमाणं तवो] उसके वृत्ति-परिसंख्यान तप है ।
छाबडा