+ काय-क्‍लेश तप -
दुस्‍सहउवसग्‍गजई, आतावणसीयवायखिण्‍णो वि ।
जो ण वि खेदं गच्‍छदि,कायकिलेसो तवो तस्‍स ॥448॥
अन्वयार्थ : [जो दुस्‍सहउवसग्‍गजई] जो दु:सह उपसर्ग को जीतने वाला है [आतावणसीयवायखिण्‍णो वि] आताप शीत वात पीडित होकर भी खेद को प्राप्‍त नहीं होता है [खेदं वि ण गच्‍छदि] चित्‍त में क्षोभ (क्‍लेश) भी नहीं करता है [तस्‍सकाय‍िकलेसो तवो] उसके काय-क्‍लेश नामक तप होता है ।

  छाबडा