
अह कह वि पमादेण य, दोसो तदि एदि तं पि पयडेदि ।
णिद्दोससाहुमूले, दसदोसविवज्जिदो होदुं ॥450॥
अन्वयार्थ : [अह कह वि पमादेण य दोसो तदि एदि तं पि] अथवा किसी प्रमाद से अपने चारित्र में दोष आया हो तो उसको [णिद्दोससाहुमूले दसदोसविवज्जिदो होदुं] निर्दोष आचार्य के पास दस दोषों से रहित होकर प्रकट करे ।
छाबडा