+ विनय तप -
विणयो पंचपचारो, दंसणणाणे तहा चरित्‍ते य ।
वारसभेयम्मि तवे, उवयारो बहुविहो णेओ ॥454॥
अन्वयार्थ : [विणयो पंचपयारो] विनय पांच प्रकार का है [दंसणणाणे तहा चरित्‍ते य] दर्शन में, ज्ञान में तथा चारित्र में और [वारसभेयम्मि तवे] बारह प्रकार के तप में विनय [उवयारो बहुविहो णेओ] और उपचार विनय इस प्रकार यह अनेक प्रकार का जानना चाहिये ।

  छाबडा