जो जुद्धकामसत्‍थं, रायदोसेहिं परिणदो पढइ ।
लोयावंचणहेदुं, सज्‍झाओ णिप्‍फलो तस्‍स ॥462॥
अन्वयार्थ : [जो जुद्धकामसत्‍‍थं रायदोसेहिं परिणदो] जो युद्ध के और काम-कथा के शास्‍त्र राग-द्वेष परिणाम से [लोयावंचणहेदुं पढइ] लोगों को ठगने के लिए पढ़ता है [सज्‍झाओ णिप्‍फलो तस्‍स] उसका स्वाध्याय निष्फल है ।

  छाबडा