
जो देहधारणपराक, उवयरणादिविसेससंत्तो ।
बाहिरववहाररओ, काओसग्गो कुदो तस्स ॥467॥
अन्वयार्थ : [जो देहधारणपरो] जो देह का पालन करने में तत्पर हो [उवयरणादीसेससंसत्तो] उपकरणादिक में विशेष संसक्त हो, [आहीरववहाररओ] बाह्य व्यवहार करने में रत हो [तस्सकाओसग्गो कुदो] उसके कायोत्सर्ग तप कैसे हो ?
छाबडा