+ धर्म-ध्यान का स्‍वरूप -
धम्‍मो वत्‍थुसहावो, खमादिभावो य दसविहो धम्‍मो ।
रयणत्‍तयं च ध्‍म्‍मो, जीवाणं रक्‍खणं धम्‍मो ॥476॥
अन्वयार्थ : [वत्‍थुसहावो धम्‍मो] वस्‍तु का स्‍वभाव धर्म है [खमादिभावो य दसविहो धम्‍मो] दस प्रकार के क्षमादिभाव धर्म है [रयण्‍त्‍तंयं च धम्‍मो] रत्‍नत्रय (सम्‍यग्‍दर्शन ज्ञान चारित्र) धर्म है [जीवाणं रक्‍खणं धम्‍मो] और जीवों की रक्षा करना भी धर्म है ।

  छाबडा