
वज्जियसयलवियप्पो, अप्पसरूवे मणं णिरूंधत्तो ।
जं चिंतदि साणंदं, तं धम्मं उत्तमं ज्झाणं ॥480॥
अन्वयार्थ : [जं वज्जियसयलवियप्पो] जो समस्त विकल्पों को छोड़ [अप्पसरूवे मणं णिरूंधंत्तो] आत्म-स्वरूप में मन को रोककर [साणंदं चिंतदि] आनन्द सहित चिन्तवन करता है [तं उत्तमं धम्मं ज्झाणं] उसके उत्तम धर्म-ध्यान है ।
छाबडा