+ ग्रन्थ-कर्ता द्वारा ग्रन्थ करने का कारण -
जिणवयणभावणट्टं, सामिकुमारेण परपसद्धाए ।
रइया अणुवेक्‍खाओ, चंचलमण-रूंभणट्ठंच ॥487॥
अन्वयार्थ : [अणुवेक्‍खाओ] यह अनुप्रेक्षा नामक ग्रन्‍थ [सामिकुमारेण] स्‍वामिकुमार ने [परमसद्धाए] श्रद्धापूर्वक [जिणवयणभावणट्टं] जिनवचन की भावना के लिये [चंचलमणरूंभण्‍ट्ठं च रइया] और चंचल मन को रोकनेके लिये रचा (बनाया) है ।

  छाबडा