
तिहुयणपहाणस्वामिं, कुमारकाले वि तावय विचरणं ।
वसुपुज्जसुयं मल्लिं, चरिमतियं संथुवे णिच्चं ॥489॥
अन्वयार्थ : [तिहुयणपहाणस्वामिं] तीन भुवन के प्रधान स्वामी तीर्थंकर-देव जिन्होंने [कुमारकाले वि तविय तवचरणं] कुमारकाल में ही तपश्चरण धारण किया ऐसे [वसुपुज्जसुयं मल्लिं यरिमतियं] वसुपूज्य राजा के पुत्र वासुपूज्य-जिन, मल्लि-जिन और चरिमतिय का मैं [णिच्चं संथुवे] नित्य ही स्तवन करता हूँ ।
छाबडा