+ व्यवहारनय का प्रयोजन -
माणवक एव सिंहो यथा भवत्यनवगीत सिंहस्य ।
व्यवहार एव हि तथा निश्चयतां यात्यनिश्चयज्ञस्य ॥7॥
जिसे शेर का ज्ञान नहीं वह बिल्ली को ही सिंह जाने ।
निश्चय से अनजान जीव व्यवहार-कथन निश्चय मान ॥७॥
अन्वयार्थ : [यथा] जिस प्रकार [अनवगीत सिंहस्य] सिंह को सर्वथा न जाननेवाले पुरुष के लिये [माणवक:] बिलाव [एव] ही [सिंह:] सिंहरूप [भवति] होता है, [हि] निश्चय से [तथा] उसी प्रकार [अनिश्चयज्ञस्य] निश्चयनय के स्वरूप से अपरिचित पुरुष के लिये [व्यवहार:] व्यवहार [एव] ही [निश्चयतां] निश्चयपने को [याति] प्राप्त होता है ॥७॥
Meaning : Just as a cat represents a lion to one who has not known a lion, similarly Vyavahara alone is Nishchaya uato him who does not know what Nishchaya is.

  टोडरमल 




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