+ अतिथि संविभाग -
विधिना दातृगुणवता द्रव्यविशेषस्य जातरूपाय ।
स्वपरानुग्रहहेतो: कर्त्तव्योऽवश्यमतिथये भाग: ॥167॥
नित यथाजात दिगम्बरों को, गुणी दाता विधि से ।
निज पर अनुग्रह हेतु, वस्तु विशेष अंश अवश्य दे ॥१६७॥
अन्वयार्थ : [दातृगुणवता] दातार के गुणों से युक्त गृहस्थ के द्वारा [जातरूपाय-अतिथये] दिगम्बर मुनि को [स्वपरानुग्रहहेतो:] अपने और पर के अनुग्रह के लिय [द्रव्यविशेषस्य] विशेष द्रव्य का अर्थात् देने योग्य वस्तु का [भाग:] भाग [विधिना] विधिपूर्वक [अवश्यम्] अवश्य ही [कर्त्तव्य:] करना चाहिए ।
Meaning : For mutual good, one possessed of the qualifications of a donor, should, in a proper manner, give a portion of appropriate things to a saint, who is (naked) like one at birth.

  टोडरमल