+ सल्लेखना -
इयमेकैव समर्था धर्मस्वं मे मया समं नेतुम् ।
सततमिति भावनीया पश्चिमसल्लेखना भक्त्या ॥175॥
मरणान्त में सल्लेखना, यह एक ही धन धर्म को ।
मुझ साथ लेने में समर्थ, सभक्ति भाओ मान यों ॥१७५॥
अन्वयार्थ : [इयम्] यह [एका] एक [पश्चिमसल्लेखना एव] मरण के अन्त में होनेवाली सल्लेखना ही [मे] मेरे [धर्मस्वं] धर्मरूपी धन को [मया] मेरे [समं] साथ [नेतुम्] ले जाने में [समर्था] समर्थ है, [इति] इस प्रकार [भक्त्या] भक्तिसहित [सततम्] निरन्तर [भावनीया] भावना करनी चाहिए ।
Meaning : . One should ever be devotedly thinking of Sallekhana at the end, that "it is only this which would enable me to carry my wealth of piety withme."

  टोडरमल