
मरणान्तेऽवश्यमहं विधिना सल्लेखनां करिष्यामि ।
इति भावनापरिणतोऽनागतमपि पालयेदिदं शीलम् ॥176॥
मरणान्त में निश्चित विधि, पूर्वक करूँ सल्लेखना ।
इस भावना परिणत मरण के, पूर्व भी व्रत पालना ॥१७६॥
अन्वयार्थ : [अहं] मैं [मरणान्ते] मरण के समय [अवश्यं] अवश्य [विधिना] शास्त्रोक्त विधि से [सल्लेखनां] समाधिमरण [करिष्यामि] करूँगा, [इति] इस प्रकार [भावना परिणत:] भावनारूप परिणति करके [अनागतमपि] मरण काल आने से पहले ही [इदं] यह [शीलम्] सल्लेखनाव्रत [पालयेत्] पालना अर्थात् अंगीकार करना चाहिए ।
Meaning : "I shall certainly observe Sallekhna properly at the approach of death," is the thought one should constantly have and thus be practising the vow prematurely.
टोडरमल