
अतिचारा: सम्यक्त्वे व्रतेषु शीलेषु पञ्च पञ्चेति ।
सप्ततिरमी यथोदितशुद्धिप्रतिबन्धिनो हेया: ॥181॥
सम्यक्त्व में व्रत शील में, पाँच पाँच यों सत्तर कहे ।
नित वास्तविक शुद्धि विरोधक, हेय हैं अतिचार ये ॥१८१॥
अन्वयार्थ : [सम्यक्त्वे] सम्यक्त्व में [व्रतेषु] व्रतों में और [शीलेषु] शीलों में [पञ्च पञ्चेति] पाँच-पाँच के क्रम से [अभी] यह [सप्तति:] सत्तर [यथोदितशुद्धिप्रतिबन्धिन:] यथार्थ शुद्धि के रोकनेवाले [अतिचारा:] अतिचार [हेया:] छोड़ने योग्य हैं ।
Meaning : The following 70 defects, five in respect of each of the vratas, Sheelas and Right belief, and which prevent their prescribed purity, should be avoided
टोडरमल