
शंका तथैव काङ्क्षा विचिकित्सा संस्तवोऽन्यदृष्टीनाम् ।
मनसा च तत्प्रशंसा सम्यग्दृष्टेरतीचारा: ॥182॥
सम्यक्त्व के अतिचार शंका, कांक्षा विचिकित्सता ।
मिथ्यादृशी की स्तुति, मन से प्रशंसा जानना ॥१८२॥
अन्वयार्थ : [शंका] सन्देह [काङ्क्षा] वाँछा [विचिकित्सा] ग्लानि [तथैव] उसी प्रकार [अन्यदृष्टीनाम्] मिथ्यादृष्टियों की [संस्तव:] स्तुति [च] और [मनसा] मन से [तत्प्रशंसा] अन्य मतावलम्बियों की प्रशंसा करना [सम्यग्दृष्टे:] सम्यग्दृष्टि के [अतिचारा:] अतिचार हैं ।
Meaning : Scepticism, desire, disgust, praise of wrong believers, and thinking admiringly of them, are the defects of Right Belief.
टोडरमल