
मिथ्योपदेशदानं रहसोऽभ्याख्यानकूटलेखकृती ।
न्यासापहारवचनं साकारमन्त्रभेदश्च ॥184॥
उपदेश मिथ्या दे, बताना गुप्त एकान्ति रहस ।
सब लेख लिखना असत्, कहना वचन न्यासापहार युत॥
सब काय चेष्टा से समझ, अभिप्राय पर का बताना ।
ये पाँच हैं सत्याणुव्रत के, दोष इनको मिटाना ॥१८४॥
अन्वयार्थ : [मिथ्योपदेशदानं] झूठा उपदेश देना, [रहसोऽभ्याख्यानकूट-लेखकृती] एकान्त की गुप्त बातों को प्रगट करना, झूठा लेख लिखना, [न्यासापहारवचनं] धरोहर के हरण करने का वचन कहना [च] और [साकारमन्त्रभेद:] काय की चेष्टा जानकर दूसरे का अभिप्राय प्रगट करना-यह पाँच सत्याणुव्रत के अतिचार हैं ।
Meaning : False preaching, disclosing secrets, forgery, breach of trust, and divulging inferences drawn from behaviour or gestures .
टोडरमल