
प्रेष्यस्य संप्रयोजनमानयनं शब्दरूपविनिपातौ ।
क्षेपोऽपि पुद्गलानां द्वितीयशीलस्य पंचेति ॥189॥
निज सीम बाहर भेजना या, मँगाना शब्द सुनाना ।
आकार से संकेत, पुद्गल फेक दोष देशव्रत का ॥१८९
अन्वयार्थ : [प्रेषस्य संप्रयोजनम्] प्रमाण किये हुए क्षेत्र के बाहर दूसरे मनुष्य को भेजना, [आनयनं] वहाँ से कोई वस्तु मँगाना [शब्दरूपविनिपातौ] शब्द सुनाना, रूप दिखाकर इशारा करना और [पुद्गलानां] कंकड़ आदि पुद्गल [क्षेत्रोऽपि] भी फेंकना [इति] इस प्रकार [पञ्च] पाँच अतिचार [द्वितीयशीलस्य] दूसरे शील के अर्थात् देशव्रत के कहे गए हैं ।
Meaning : Sending, detaining, speaking out, making gestures, throwing articles, limits 5 of the second Sheela .
टोडरमल