+ सामायिक के पाँच अतिचार -
वचनमन:कायानां दु:प्रणिधानं त्वनादरश्चैव ।
स्मृत्यनुपस्थानयुता: पंचेति चतुर्थशीलस्य ॥191॥
मन वचन तन की दुष्प्रवृत्ति, अनादर अरु व्यग्रता ।
से विस्मरण व्रत सामायिक के, दोष इनको हटाना ॥१९१॥
अन्वयार्थ : [स्मृत्यनुपस्थानयुता:] स्मृतिअनुपस्थान सहित [वचनमन: कायानां] वचन, मन, और काय की [दु:प्रणिधानं] खोटी प्रवृत्ति [तु] और [अनादर:] अनादर [इति] इस प्रकार [चतुर्थशीलस्य] चौथे शील अर्थात् सामायिकव्रत के [पञ्च] पाँच [एव] ही अतिचार हैं ।
Meaning : Misdirection of speech, mind and body; lack of interest, and forgetting due observances are 5 (breaches) of the fourth Sheela (Samayik).

  टोडरमल