
अनवेक्षिताप्रमार्जितमादानं संस्तरस्तथोत्सर्ग: ।
स्मृत्यनुपस्थानमनादरश्च पञ्चोपवासस्य ॥192॥
देखे बिना शोधे बिना, कर ग्रहण संस्तर विसर्जन ।
हो अनादर विस्मरण व्यग्र, ये दोष प्रोषधोपवास व्रत ॥१९२॥
अन्वयार्थ : [अनवेक्षिताप्रमार्जितमादानं] देखे बिना अथवा शुद्ध किये बिना ग्रहण करना, [सस्तर:] चटाई आदि बिस्तर लगाना [तथा] तथा [उत्सर्ग:] मलमूत्र का त्याग करना [स्मृत्यनुपस्थानम्] उपवास की विधि भूल जाना [च] और [अनादर:] अनादर-यह [उपवासस्य] उपवास के [पञ्च] पाँच अतिचार हैं ।
Meaning : Taking up articles, using seats, passing excrements, without looking at and sweeping, forgetting the rules, and lack of interest are 5 of Upavasa .
टोडरमल