
आहारो हि सचित्त: सचित्तमिश्र सचित्तसम्बन्ध: ।
दुष्पक्वोऽभिषवोपि च पञ्चामी षष्ठशीलस्य ॥193॥
लेना सचित्ताहार मिश्रित, सचित संग दुपक्व हो ।
कामोत्तेजक दोष, भोगोपभोग सीम व्रत ये तजो ॥१९३॥
अन्वयार्थ : [हि] निश्चय से [सचित्त: आहार:] सचित्त आहार, [सचित्त मिश्र:] सचित्त मिश्र आहार, [सचित्त सम्बन्ध:] सचित्त के सम्बन्धवाला आहार, [दुष्पक्व:] दुष्पक्व आहार [च अपि] और [अभिषव आहार] *अभिषव आहार [अभी] यह [पञ्च] पाँच अतिचार [षष्ठशीलस्य] छट्ठे शील अर्थात् भोगोपभोगपरिमाण व्रत के हैं ।
Meaning : Eating articles having life, articles mixed with those having life, articles in contact with those having life, articles not well cooked or digested, aphrodisiacal food are 5 transgressions of the sixth Sheela .
टोडरमल