
परदातृव्यपदेश: सचित्तनिक्षेपतत्पिधाने च ।
कालस्यातिक्रमणं मात्सर्य्यं चेत्यतिथिदाने ॥194॥
पर से दिलाना सचित्त रखना, सचित्त से ढकना समय ।
का अतिक्रमण मात्सर्य, अतिथिदान में ये दोष तज ॥१९४॥
अन्वयार्थ : [परदातृव्यपदेश:] परदातृव्यपदेश, [सचित्त निक्षेपतत्पिधाने च] सचित्तनिक्षेप और सचित्तपिधान, [कालस्यातिक्रमणं] काल का अतिक्रम [च] और [मात्सर्य्यं] मात्सर्य- [इति] इस प्रकार [अतिथिदाने] अतिथिसंविभागव्रत के पाँच अतिचार हैं ।
Meaning : Delegation of host's duties, placing the food on Sachitta articles, covering the food with Sachitta, not serving meal at proper time, lack of interest are transgressions in Achitta-dana .
टोडरमल