
जीवितमरणाशंसे सुहृदनुराग: सुखानुबन्धश्च ।
सनिदान: पञ्चैते भवन्ति सल्लेखनाकाले ॥195॥
जीने की इच्छा मरण इच्छा, मित्र राग सुखानुबन्ध ।
अरु है निदान सल्लेखना के, काल में ये दोष तज ॥१९५॥
अन्वयार्थ : [जीवितमरणाशंसे] जीवन की आशंसा, मरण की आशंसा, [सुहृदनुराग:] सुहृद अर्थात् मित्र के प्रति अनुराग, [सुखानुबन्ध:] सुख का अनुबन्ध [च] और [सनिदान:] निदान सहित- [एते] यह [पञ्च] पाँच अतिचार [सल्लेखनाकाले] समाधिमरण के समय [भवन्ति] होते हैं ।
Meaning : A desire to live, a desire to die, attachment to friends, recollection of pleasures, and desire for future pleasures, these 5 are at the time of Salle. khana.
टोडरमल