चारित्रान्तर्भावात् तपोपि मोक्षाङ्गमागमे गदितम् ।
अनिगूहितनिजवीर्यैस्तदपि निषेव्यं समाहितस्वान्तै: ॥197॥
चारित्र अन्तर्भाव से, तप भी सुसाधन मोक्ष का ।
नहिं छुपा सेवो यथाशक्ति, सावधानी से कहा ॥१९७॥
अन्वयार्थ : [आगमे] जैन आगम में [चारित्रान्तर्भावात्] चारित्र का अन्तर्वर्त्ती होने से [तप:] तप को [अपि] भी [मोक्षाङ्गम्] मोक्ष का अंग [गदित्तम्] कहा गया है अत: [अनिगूहितनिजवीर्यै:] अपना पराक्रम न छुपानेवाले तथा [समाहितस्वान्तै:] सावधान चित्तवाले पुरुषों को [तदपि] उस तप का भी [निषेव्यम्] सेवन करना योग्य है ।
Meaning : Austerity is also said, in the Scriptures, to be helpful to Moksha because it is included in Right Conduct, Therefore it ought to be practised by those who have a well-controlled mind, and who do not ignore their capacities.

  टोडरमल