
अनशनमवमौदर्यं विविक्तशय्यासनं रसत्याग: ।
कायक्लेशो वृत्ते: सङ्ख्या च निषेव्यमिति तपो बाह्यम् ॥198॥
अनशन अवमौदर्य, शैयासन विविक्त रस त्याग हैं ।
तनक्लेश वृत्ति परी संख्या, बाह्य तप नित सेव्य हैं ॥१९८॥
अन्वयार्थ : [अनशनं] अनशन, [अवमौदर्यं] ऊनोदर, [विविक्तशय्यासनं] विविक्त शय्यासन, [रसत्याग:] रस परित्याग, [कायक्लेश:] कायक्लेश [च] और [वृत्ते: संख्या] वृत्ति की संख्या-[इति] इस प्रकार [बाह्य तप:] बाह्यतप का [निषेव्यम्] सेवन करना योग्य है ।
Meaning : Fasting, reduced diet, sleeping and resting in lonely places, renouncing the Rasas bodily suffering, mental vow to accept food under undisclosed conditions, are external austerities and should be practised.
टोडरमल