सम्यक्त्वबोधचारित्रलक्षणो मोक्षमार्ग इत्येष: ।
मुख्योपचाररूप: प्रापयति परं पदं पुरुषम् ॥222॥
मुख्योपचारमई सुसमकित, बोध चारित्र युक्त यह ।
शिवमार्ग आतम को परम, पद प्राप्त करवाता सतत ॥२२२॥
अन्वयार्थ : [इति] इस प्रकार [एष:] यह पूर्वकथित [मुख्योपचाररूप:] निश्चय और व्यवहाररूप [सम्यक्त्वबोधचारित्रलक्षण:] सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चारित्र लक्षणवाला [मोक्षमार्ग:] मोक्ष का मार्ग [पुरुषं] आत्मा को [परं पदं] परमात्मा का पद [प्रापयति] प्राप्त करवाता है ।
Meaning : This path of salvation, known as Right Belief, Knowledge and Conduct combined, has a Real and a Practical aspect; it leads the soul to the highest Stage

  टोडरमल