+ परमात्मा का स्वरूप -
कृतकृत्य: परमपदे परमात्मा सकलविषयविषयात्मा ।
परमानन्दनिमग्नो ज्ञानमयो नन्दति सदैव ॥224॥
नित ज्ञानमय सर्वज्ञ, परमानन्द स्थिर कृत्यकृत ।
परमात्मा निज परम पद, में विराजित आनन्दयुत ॥२२४॥
अन्वयार्थ : [कृतकृत्य:] कृतकृत्य [सकलविषयविषयात्मा] समस्त पदार्थ जिनके विषय हैं (सर्व पदार्थों के ज्ञाता) [परमानन्दनिमग्न:] परम-आनन्द में अतिशय मग्न [ज्ञानमय:] ज्ञानमय ज्योतिरूप [परमात्मा] मुक्तात्मा [परमपदे] सर्वोच्च पद (मोक्ष) में [सदैव] निरन्तर ही [नन्दति] आनन्दरूप से विराजमान हैं ।
Meaning : Quite contented, all knowables being reflected in Him, immersed in supreme Bliss, the embodiinent of know. ledge, the Paramat:na is eternally Happy in the Highest Stage.

  टोडरमल