+ तप आराधना -
बारहविहतवयरणे कीरइ जो उज्जमो ससत्तीए ।
सा भणिया जिणसुत्ते तवम्मि आराहणा णूणं ॥7॥
द्वादशविधतपश्चरणे क्रियते य उद्यमः स्वशक्त्या ।
सा भणिता जिनसूत्रे तपसि आराधना नूनम् ॥७॥
द्वादश विध तप में करे, उद्यम शक्ति प्रमाण ।
वह है तप आराधना, जिन आगम में जान ॥७॥
अन्वयार्थ : [ससत्तीए] अपनी शक्ति के अनुसार [बारहविहतवयरणे] बारह प्रकार के तपश्चरण में [जो उज्जमो] जो उद्यम [कीरइ] किया जाता है [सा] वह [णूणं] निश्चय से [जिणसुत्ते] जिनागम में [तवम्मि आराहणा] तप आराधना [भणिया] कही गई है ।