+ ज्ञान द्वारा परिषह पर विजय -
सीयाई बावीसं परिसहसुहडा हवंति णायव्वा ।
जेयव्वा ते मुणिणा वरउवसमणाणखग्गेण ॥40॥
शीतादयो द्वाविंशतिः परीषहसुभटा भवंति ज्ञातव्याः ।
जेतव्यास्ते मुनिना वरोपशमज्ञानखङ्गेन ॥४०॥
शीतादिक बाईस ये, विकट परीषह धार ।
उन्हें जीतता साधुवर, ले उपशम तलवार ॥४०॥
अन्वयार्थ : [सीयाई] शीत आदि [बावीसं] बाईस [परिसहसुहडा] परीषहरूपी सुभट [णायव्वा] जानने योग्य [हवंति] हैं, [मुणिणा] मुनि के द्वारा [ते] वे परिषह रूपी सुभट [वरउपसमणाणखग्गेण] उत्कृष्ट उपशमभाव रूपी ज्ञान खड़ग से [जेयव्वा] जीतने योग्य हैं ।