+ विषयाभिलाषी के सभी प्रयास व्यर्थ -
सव्वं चायं काऊ विसए अहिलससि गहियसण्णासे ।
जइ तो सव्वं अहलं दंसण णाणं तवं कुणसि ॥54॥
सर्व त्याग संन्यास ले, यदि विषयों में आश ।
तो दर्शन, चारित्र में, तेरा व्यर्थ प्रयास ॥५४॥
सर्व त्याग संन्यास ले, यदि विषयों में आश ।
तो दर्शन, चारित्र में, तेरा व्यर्थ प्रयास ॥५४॥
अन्वयार्थ : [सव्वं चायं काऊ] सर्व त्याग कर [गहियसण्णासे] संन्यास के ग्रहण करने पर भी [जइ] यदि तू [विसए अहिलससि] विषयों की अभिलाषा करता है [तो] तो [सव्वं] समस्त [दंसण णाणं तवं] दर्शन, ज्ञान और तप को [अहलं] निष्फल [कुणसि] करता है ।