
एवंगुणो हु अप्पा जो सो भणिओ हु मोक्खमग्गोत्ति ।
अहवा स एव मोक्खो असेसकम्मक्खए हवइ ॥82॥
एवं गुणो ह्यात्मा यः स भणितो हि मोक्षमार्ग इति ।
अथवा स एव मोक्षः अशेषकर्मक्षये भवति ॥८२॥
गुण स्वरूप मय जीव को, मोक्षमार्ग तू जान ।
सर्व कर्म क्षय से मिले, अति पुनीत निर्वाण ॥८२॥
अन्वयार्थ : [हु] निश्चय से [एवंगुणो] इसप्रकार के गुणों से युक्त [जो अप्पा] जो आत्मा है [सो हु] वही [मोक्खमग्गोत्ति] मोक्षमार्ग इस शब्द से [भणिओ] कहा गया है । [अहवा] अथवा [असेसकम्मक्खए] समस्त कर्मों का क्षय होने पर [स एव] वही आत्मा [मोक्खो] मोक्ष [हवइ] होता है ।