
जाम वियप्पो कोई जायइ जोइस्स झाणजुत्तस्स ।
ताम ण सुण्णं झाणं चिंता वा भावणा अहवा ॥83॥
यावद्विकल्पः कश्चिदपि जायते योगिनो ध्यानयुक्तस्य ।
तावन्न शून्यं ध्यानं चिंता वा भावना अथवा ॥८३॥
ध्यान युक्त मुनि को रहे, जब तक लेश विकल्प ।
वह है चिन्ता भावना, नहीं ध्यान अविकल्प ॥८३॥
अन्वयार्थ : [झाणजुत्तस्स] ध्यान से युक्त [जोइस्स] मुनि के [जाम] जब तक [कोई वियप्पो] कोई विकल्प [जायइ] उत्पन्न होता है [ताम] तब तक [सुण्णं] शून्य - निर्विकल्प [झाणं] ध्यान [ण] नहीं होता? किन्तु [चिन्ता वा] चिन्ता [अहवा] अथवा [भावणा] भावना होती है ।