
कालमणंतं जीवो अणुहवइ सहावसुक्खसंभूइं ।
इंदियविसयातीदं अणोवमं देहपरिमुक्को ॥89॥
कालमनंतं जीवोऽनुभवति स्वभावसंभवं सौख्यम् ।
इंद्रियविषयातीतां अनुपमां देहपरिमुक्तः ॥८९॥
आत्मजन्य सुख अनुभवें, सिद्ध अपरिमित काल ।
जो सुख विषयातीत है, अनुपम और विशाल ॥८९॥
अन्वयार्थ : [देहपरिमुक्को] शरीर से रहित [जीवो] सिद्धात्मा [कालमणंतं] अनन्त काल तक [इंदियविसयातीदं] इन्द्रिय के विषयों से रहित और [अणोवमं] अनुपम [सहावसुक्खसंभूइं] स्वाभाविक सुख की विभूति का [अणुहवइ] अनुभव करते हैं ।