+ वह विनय पाँच प्रकार की है, वही कहते हैं - -
विणओ पुणओ पंचविहो णिद्दिठ्ठो णाणदंसणचरित्ते ।
तवविणवो य चउत्थो चरिमो उवयारिओ विणओ ॥114॥
विनय कही है पाँच तरह की ज्ञान और दर्शन चारित्र ।
चौथी विनय कही है तप अरु अन्तिम है उपचार विनय॥114॥
अन्वयार्थ : विनय के पाँच प्रकार कहे हैं- पहला ज्ञान विनय, दूसरा दर्शन विनय, तीसरा चारित्र विनय, चौथा तप विनय तथा पाँचवाँ उपचार विनय ।

  सदासुखदासजी