पणिधाणं पि य दुविहं इंदिय णोइंदियं च वोधव्वं ।
सद्दादि इंदियं पुण कोधाईयं भवे इदरं॥118॥
इन्द्रिय एवं नोइन्द्रिय प्रणिधान भेदद्वय कहें मुनीन्द्र ।
शब्द आदि हैं इन्द्रिय एवं क्रोधादिक हैं नोइन्द्रिय॥118॥

  सदासुखदासजी