
काइयवाइयमाणसिओत्ति तिविधोहु पंचमो विणओ ।
सो पुण सव्वो दुविहो पच्चक्खो चेव पारोक्खो॥123॥
कायिक वाचिक और मानसिक तीन भेद उपचार विनय ।
ये तीनों भी दो प्रकार प्रत्यक्ष और परोक्ष विनय॥123॥
अन्वयार्थ : पाँचवीं विनय जो उपचार विनय है, वह कायिक/काय संबंधी, वाचिक/वचन संबंधी मानसिक/मन संबंधी - ऐसे तीन प्रकार की है और यह तीन प्रकार की विनय प्रत्यक्षप रोक्ष की अपेक्षा दो प्रकार की है ।
सदासुखदासजी