पं-सदासुखदासजी
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आगे दो गाथाओं में वचन संबंधी उपचार विनय को कहते हैं -
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पूयावयणं हिदभासणं च मिदभासणं महुरं च ।
सुत्ताणुवीचिवयणं अणिट्ठुरमकक्कसं वयणं॥128॥
पूजापूर्वक1 वचन बोलना हित-मित और मधुर भाषण ।
सूत्रों के अनुसार अनिष्ठुर तथा अकर्कश वचन विनय॥128॥
सदासुखदासजी