+ आगे कायिक, वाचिक, मानसिक जो तीन प्रकार की विनय है, उसके प्रत्यक्ष और परोक्ष ऐसे दो-दो भेद कहते हैं - -
इय एसो पच्चक्खो विणओ पारोक्खिओ वि जं गुरुणो ।
विरहम्मि विविट्टिज्जइ आणाणिद्देसचरियाए॥131॥
इसप्रकार प्रत्यक्ष विनय है, और परोक्ष विनय पहचान ।
जब गुरु हों अनुपस्थित तब उनकी आज्ञा करना पालन॥131॥
अन्वयार्थ : इसप्रकार यह प्रत्यक्ष विनय गुरुजन समीप में होने पर होती है, इसलिए प्रत्यक्ष विनय है तथा गुरुजनों के परोक्ष होने पर या अभाव होने पर गुरुजनोंे की आज्ञाप्रमाण दर्शन-ज्ञान-चारित्र में प्रवर्तना, यह परोक्ष विनय भी अंगीकार करने योग्य है ।

  सदासुखदासजी