+ जो दोष होते हैं, उन्हें यहाँ पाँच गाथाओं द्वारा दिखाते हैं- -
वादुब्भामो व मणो परिधावइ अट्ठिदं तह समंता ।
सिग्घं च जाइ दूरं पि मणो परमाणुदव्वं वा॥139॥
अस्थिर मन तूफानी गति से चारों दिशि में गमन करे ।
अत्यन्त दूरवर्ती पदार्थ तक परमाणुवत् मन पहुँचे॥139॥

  सदासुखदासजी