
आइरियधारणाए संघो सव्वो वि धारिओ होदि ।
संघस्स धारणाए अव्वोच्छित्ती कया होई॥328॥
सूरि1 धारणा2 से होता है सकल संघ का अवधारण ।
अव्युच्छित्ति होती है करने से सकल संघ धारण॥328॥
अन्वयार्थ : जिन्होंने वैयावृत्त्य करके आचार्य को धारण/प्राप्त किया, उन्होंने सर्व संघ को धारण/प्राप्त किया और संघ को धारण करके रत्नत्रय धर्म की अव्युच्छित्ति की ।
सदासुखदासजी